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उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर बोले पीएम मोदी, भारत हमेशा निभाएगा दोस्ती का वादा

lokvaanidesk|Published: 30 August 2026 at 3:47 pm IST|पढ़ने का समय: 7 मिनट|राजनीति|0 Comments
उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर बोले पीएम मोदी, भारत हमेशा निभाएगा दोस्ती का वादा

 

उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर बोले पीएम मोदी, भारत हमेशा निभाएगा दोस्ती का वादा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ओली दाराजली दोस्तलिक’ ऑर्डर से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने ताशकंद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दोस्ती, राजनीतिक साझेदारी, व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए दिया गया।

सम्मान मिलने के बाद पीएम मोदी ने इसे अपने लिए व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं माना। उन्होंने कहा कि यह सम्मान भारत के 140 करोड़ लोगों का सम्मान है। प्रधानमंत्री ने उज्बेकिस्तान की जनता, वहां की सरकार और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव का धन्यवाद किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत हमेशा उज्बेकिस्तान के साथ अपनी दोस्ती और जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाएगा।

क्या है ‘ओली दाराजली दोस्तलिक’ सम्मान?

‘ओली दाराजली दोस्तलिक’ उज्बेकिस्तान के सबसे बड़े राजकीय सम्मानों में शामिल है। इसे उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने देश के साथ दोस्ती, सहयोग और विभिन्न क्षेत्रों में संबंध बेहतर बनाने में खास योगदान दिया हो।

पीएम मोदी को यह सम्मान ऐसे समय मिला है, जब भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्ते लगातार नई दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देश केवल कूटनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, रक्षा, निवेश, शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन जैसे कई क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ा रहे हैं।

राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक मित्रता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, दोनों देशों के राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक और निवेश संबंधों को आगे ले जाने में प्रधानमंत्री मोदी का योगदान अहम रहा है। इसके अलावा सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाने की दिशा में भी भारत ने खास प्रयास किए हैं।

‘यह सिर्फ मेरा नहीं, 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान’

सम्मान स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह पल उनके लिए बहुत गर्व का है, लेकिन वह इसे अपना निजी सम्मान नहीं मानते। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार भारत के 140 करोड़ नागरिकों का सम्मान है।

पीएम मोदी ने कहा कि इस सम्मान में भारत और उज्बेकिस्तान के सदियों पुराने रिश्तों की झलक दिखाई देती है। दोनों देशों का जुड़ाव सिर्फ राजनीतिक या आर्थिक नहीं है, बल्कि इतिहास, संस्कृति और सभ्यता से भी जुड़ा हुआ है।

प्रधानमंत्री ने ‘दोस्तलिक’ शब्द का भी जिक्र किया। ‘दोस्तलिक’ का मतलब मित्रता होता है। उन्होंने कहा कि यह शब्द दोनों देशों के संबंधों के केंद्र में मौजूद भावना को बहुत अच्छी तरह दर्शाता है। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच यह दोस्ती समय के साथ और मजबूत हुई है।

उन्होंने कहा कि वह इस सम्मान को विनम्रता के साथ स्वीकार करते हैं और इसे दोनों देशों की साझा विरासत तथा सदियों पुरानी मित्रता को समर्पित करते हैं।

साझा इतिहास से जुड़े हैं दोनों देश

भारत और उज्बेकिस्तान के संबंध बहुत पुराने हैं। मध्य एशिया और भारत के बीच सदियों से व्यापार, संस्कृति और लोगों का संपर्क रहा है। ताशकंद, समरकंद और बुखारा जैसे शहर भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक स्मृतियों से भी जुड़े रहे हैं।

उज्बेकिस्तान का क्षेत्र ऐतिहासिक सिल्क रूट का अहम हिस्सा रहा है। इसी रास्ते से व्यापार के साथ विचार, भाषा, कला, संगीत और सांस्कृतिक प्रभाव भी एक जगह से दूसरी जगह पहुंचे। भारत और मध्य एशिया के बीच यह जुड़ाव आज भी दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत आधार देता है।

भारत में मध्य एशियाई इतिहास और संस्कृति को लेकर विशेष रुचि रही है। वहीं उज्बेकिस्तान में भी भारतीय सिनेमा, संगीत और संस्कृति को पसंद करने वाले लोगों की संख्या काफी है। दोनों देश शिक्षा, पर्यटन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर लगातार काम कर रहे हैं।

कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की ओर बढ़ते रिश्ते

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्ते अब कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के नए स्तर पर पहुंच चुके हैं। इसका मतलब है कि सहयोग केवल एक-दो क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अहम मुद्दों पर दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं।

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। मध्य एशिया का क्षेत्र सुरक्षा और रणनीतिक नजरिए से काफी महत्वपूर्ण है। आतंकवाद, कट्टरपंथ, ड्रग्स तस्करी और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के हित मिलते हैं।

इसके अलावा व्यापार और निवेश बढ़ाने की भी कोशिश हो रही है। भारत की दवा कंपनियां, आईटी सेक्टर, कृषि, टेक्नोलॉजी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उज्बेकिस्तान में सहयोग के बड़े अवसर देखती हैं। वहीं उज्बेकिस्तान भारत के लिए मध्य एशिया के बाजारों तक पहुंच बनाने में उपयोगी साझेदार बन सकता है।

कनेक्टिविटी दोनों देशों के रिश्तों का एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। भारत और मध्य एशिया के बीच सीधी और आसान परिवहन व्यवस्था बेहतर होने से व्यापार, पर्यटन और लोगों का आपसी संपर्क बढ़ सकता है। चाबहार पोर्ट, इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और अन्य क्षेत्रीय मार्गों को इसी नजर से देखा जाता है।

राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के नेतृत्व की सराहना

संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के नेतृत्व की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके मित्र और उज्बेकिस्तान के आर्थिक विकास के प्रमुख चेहरों में शामिल राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने पूरे क्षेत्र के लिए एक उदाहरण पेश किया है।

पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के नेतृत्व में उज्बेकिस्तान ने आर्थिक सुधारों, विकास और क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में उल्लेखनीय काम किया है। दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत विश्वास और नियमित संवाद भी भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को मजबूत बनाने में मददगार रहा है।

किसी भी दो देशों के रिश्तों में सरकारी समझौते महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन नेताओं के बीच भरोसा और स्पष्ट बातचीत भी उतनी ही जरूरी है। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच हाल के वर्षों में यही भरोसा मजबूत होता दिखाई दिया है।

सम्मान के साथ जिम्मेदारी भी

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कोई भी पुरस्कार अपने साथ सम्मान और गौरव तो लाता ही है, लेकिन वह जिम्मेदारी भी बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि भारत इस जिम्मेदारी को समझता है और वह दोनों देशों की दोस्ती को और गहरा बनाने के लिए लगातार काम करता रहेगा।

उन्होंने उज्बेकिस्तान की धरती से वहां के लोगों को भरोसा दिलाया कि भारत अपनी दोस्ती से कभी पीछे नहीं हटेगा। भारत दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए पूरी गंभीरता और ईमानदारी से आगे बढ़ता रहेगा।

पीएम मोदी के इस संदेश को सिर्फ औपचारिक बयान के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह भारत की मध्य एशिया नीति और क्षेत्रीय साझेदारी की प्राथमिकताओं को भी दिखाता है। भारत इस क्षेत्र के देशों के साथ कनेक्टिविटी, विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है उज्बेकिस्तान?

उज्बेकिस्तान मध्य एशिया का एक अहम देश है और भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साझेदार है। यह क्षेत्र ऊर्जा संसाधनों, व्यापार मार्गों और सुरक्षा के नजरिए से काफी अहम माना जाता है।

भारत के लिए उज्बेकिस्तान के साथ मजबूत रिश्ते कई मायनों में उपयोगी हैं। इससे भारत को मध्य एशिया में अपनी आर्थिक और कूटनीतिक मौजूदगी बढ़ाने का अवसर मिलता है। साथ ही, आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता से जुड़े मुद्दों पर सहयोग भी मजबूत होता है।

उज्बेकिस्तान के लिए भारत एक बड़ा बाजार, भरोसेमंद विकास साझेदार और टेक्नोलॉजी, दवा, शिक्षा तथा डिजिटल सेवाओं का प्रमुख स्रोत है। इसलिए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने का फायदा सिर्फ सरकारों को नहीं, बल्कि आम लोगों और कारोबारियों को भी मिल सकता है।

पीएम मोदी को मिला ‘ओली दाराजली दोस्तलिक’ सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के मजबूत होते रिश्तों का प्रतीक है। यह सम्मान बताता है कि दोनों देश अपनी पुरानी दोस्ती को आधुनिक जरूरतों और नई साझेदारियों के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं।

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