नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप: नासा का नया "खोज का स्वर्ण युग"

ऐतिहासिक लॉन्च: 30 अगस्त 2026
नासा का अत्यंत महत्वाकांक्षी नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप (Nancy Grace Roman Space Telescope) 30 अगस्त 2026 को सुबह 7:26 बजे EDT (भारतीय समयानुसार शाम 4:56 बजे) फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह मिशन स्पेसएक्स के फाल्कन हेवी रॉकेट पर सवार था, जो अपना 13वां उड़ान मिशन निभा रहा था।
रोमन टेलीस्कोप का वजन 18,000 पाउंड (लगभग 8,000 किलोग्राम) है और यह पूरी तरह से ईंधन से भरा होने पर 20,000 पाउंड से अधिक वजन करता है। लॉन्च के लगभग 31 मिनट बाद टेलीस्कोप को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में तैनात किया गया। [web:14]
मिशन का उद्देश्य और वैज्ञानिक महत्व
रोमन स्पेस टेलीस्कोप नासा का एक फ्लैगशिप अवरक्त (infrared) अवलोकनशाला मिशन है, जो ब्रह्मांड की कुछ सबसे बड़ी पहेलियों को सुलझाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके तीन मुख्य वैज्ञानिक उद्देश्य हैं:
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डार्क एनर्जी और डार्क मैटर का अध्ययन: रोमन टेलीस्कोप यह पता लगाएगा कि डार्क एनर्जी ने ब्रह्मांड के विस्तार को कैसे प्रभावित किया है और कॉस्मिक इतिहास में ब्रह्मांड कैसे विकसित हुआ है।
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एक्सोप्लैनेट्स की खोज: यह टेलीस्कोप लगभग 1,00,000 नए एक्सोप्लैनेट्स (हमारे सौर मंडल के बाहर के ग्रह) खोजने का लक्ष्य रखता है।
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आकाशगंगाओं का विशाल मानचित्रण: रोमन अरबों आकाशगंगाओं का मानचित्र तैयार करेगा और डार्क मैटर की संरचना और वितरण को समझने में मदद करेगा।
तकनीकी विशेषताएं और क्षमताएं
300-मेगापिक्सल का शक्तिशाली कैमरा
रोमन टेलीस्कोप में 300-मेगापिक्सल का एक विशाल और अत्यंत संवेदनशील कैमरा लगा है, जो हबल टेलीस्कोप की तुलना में 100 गुना बड़ा फील्ड ऑफ व्यू प्रदान करता है। इसका वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट (Wide Field Instrument) सिर्फ 5 साल में हबल द्वारा 30 साल में की गई अवलोकन से 50 गुना अधिक आकाश का चित्रण करेगा।
दो वैज्ञानिक उपकरण
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वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट (WFI): यह अवरक्त प्रकाश में अत्यंत स्पष्ट और विशाल छवियां कैप्चर करेगा, जो डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और एक्सोप्लैनेट्स की खोज में सहायक होगा।
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कोरोनाग्राफ इंस्ट्रूमेंट (CGI): यह उपकरण पहले से खोजे गए एक्सोप्लैनेट्स का सीधे चित्रण और अध्ययन करेगा, जो मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोनॉमी द्वारा विकसित जटिल ऑप्टोमैकेनिकल सिस्टम का उपयोग करता है।
कनाडाई तकनीक का योगदान
रोमन टेलीस्कोप में दो अल्ट्रा-सेंसिटिव कैमरे लगे हैं, जो दो कनाडाई कंपनियों—Nүvү Cameras और ABB—द्वारा विकसित किए गए हैं।
L2 लैग्रेंज पॉइंट: टेलीस्कोप का गंतव्य
रोमन टेलीस्कोप को सूर्य-पृथ्वी के दूसरे लैग्रेंज पॉइंट (L2) पर भेजा जा रहा है, जो पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर (9,30,000 मील) दूर स्थित है। यह वही स्थान है जहाँ नासा का जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप भी स्थित है।
L2 पॉइंट पर सूर्य और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं, जिससे रोमन को बिना प्रोपल्शन के सूर्य की परिक्रमा करने की अनुमति मिलती है। यह स्थान टेलीस्कोप के लिए अत्यंत स्थिर और आदर्श है, जहाँ यह बिना किसी बाधा के ब्रह्मांड का अवलोकन कर सकता है।
मिशन अवधि और भविष्य की संभावनाएं
रोमन टेलीस्कोप का प्राथमिक मिशन काल 5 साल का है, लेकिन यह अतिरिक्त 5 साल के विस्तारित मिशन का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका मतलब है कि यह टेलीस्कोप कुल 10 साल तक ब्रह्मांड की खोज कर सकता है।
नासा और सरकार की प्रतिक्रिया
नासा के प्रशासक जेरेड आइजैकमैन (Jared Isaacman) ने इस लॉन्च को "खोज के स्वर्ण युग" (Golden Age of Discovery) की शुरुआत बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी लॉन्च टीम को बधाई दी और इस flawless लॉन्च की सराहना की।
फाल्कन हेवी रॉकेट की ताकत
230 फीट लंबा फाल्कन हेवी रॉकेट स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट के तीन रीयूजेबल कोर बूस्टर से बना है, जिनमें से प्रत्येक 9 मर्लिन इंजनों से संचालित है। कुल मिलाकर इसमें 27 मर्लिन इंजन हैं, जो 5 मिलियन पाउंड से अधिक का थ्रस्ट उत्पन्न कर सकते हैं।
यह रॉकेट नासा के लिए चौथा प्राथमिक पेलोड लॉन्च कर रहा है, जिसमें साइकी (Psyche), GOES-U, और यूरोपा क्लिपर (Europa Clipper) मिशन शामिल हैं।
पहली तस्वीरें कब तक?
नासा के अनुसार, रोमन टेलीस्कोप द्वारा ली गई पहली तस्वीरें 2026 के अंत तक सार्वजनिक की जाने की उम्मीद है। इन छवियों में ब्रह्मांड के कुछ सबसे रहस्यमयी और दूरस्थ क्षेत्रों के अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिल सकते हैं।
वैज्ञानिकों के लिए महत्व
रोमन मिशन खगोल विज्ञान और ब्रह्मांड विज्ञान के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। यह टेलीस्कोप न केवल डार्क एनर्जी और डार्क मैटर के रहस्यों को सुलझाएगा, बल्कि हमारे सौर मंडल के बाहर संभावित रूप से रहने योग्य ग्रहों की खोज में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ट्रांजिट विधि (transit method) का उपयोग करके यह टेलीस्कोप लगभग 1,00,000 नए ग्रहों का पता लगाएगा, जबकि माइक्रोलेंसिंग प्रभाव (microlensing effect) के माध्यम से अतिरिक्त 1,000 एक्सोप्लैनेट्स की खोज की उम्मीद है।
Source: नासा, स्पेसएक्स, और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट्स के आधार पर।







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